नेपाल से सटे भारतीय गांव चकदहवा बुनियादी सुविधाओं से वंचित, कीचड़मय सड़क खोल रही विकास की हकीकत

  • तीन चार दिनों से हो रही रुक-रुक कर झमाझम बारिश से चकदहवा सड़क पूरी तरह जर्जर।
  • ग्रामीणों को आवागमन में हो रही परेशानी।

वाल्मीकि नगर से अभिमन्यु कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।प्रखंड बगहा दो के अंतर्गत वाल्मीकि नगर थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत अंतर्गत नेपाल सीमा पर स्थित चकदहवा समेत बीन टोला, कान्ही टोला, झंडू टोला में निवास करने वाले लगभग सैकड़ों ग्रामीणों को रोहुआ टोला संपर्क सड़क में बरसात के पानी के कारण सड़क जर्जर हो जाने से काफी परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। बीते 15 दिनों से हो रही लगातार रुक-रुक कर बारिश के कारण रोहुआ टोला से चकदहवा जाने वाला सड़क पूरी तरह जर्जर और खतरनाक बन गया है ।जिस पर पैदल चलना भी मुश्किल है।विद्यालय जाने वाले छात्र-छात्राओं को काफी कठिनाइयों और परेशानियों के बीच जान जोखिम में डालकर शिक्षा के लिए विद्यालय जाना पड़ता है। और उनकी पढ़ाई बाधित होती है ।जिससे उनके भविष्य में आगे बढ़ने के मार्ग में बढ़ाएं उत्पन्न होती हैं।

ज्ञात हो कि रोहुआ टोला से चकदहवा जाने वाला संपर्क सड़क टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। सड़क कच्ची होने के कारण बरसात और बाढ़ के दिनों में सड़क पूरी तरह जर्जर हो जाता है। जिससे ग्रामीणों को पैदल आवागमन करना भी मुश्किल हो जाता है।

*मुख्यधारा से कटा है यह गांव*

बताते चलें कि अभी भी इस गांव में ग्रामीणों को बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। गांव में लगे एकमात्र सोलर प्लांट से ग्रामीणों को प्रकाश की व्यवस्था की जाती है। यह सोलर प्लांट भी प्रायः खराब ही रहता है।प्रत्येक वर्ष यह गांव बाढ़ की त्रासदी भी झेलने को मजबूर होता है। गंडक का जलस्तर बढ़ने पर पूरे गांव में पानी भर जाता है। जिससे लोगों को ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करना पड़ता है।इस गांव में निवास करने वाले लोगों को अपनी जरूरत के सामानों की खरीदारी के लिए आए दिन नजदीक के बाजार वाल्मीकि नगर और भेड़ि़हारी जाने के लिए इस सड़क का उपयोग करना पड़ता है।गांव के नजदीक का स्वास्थ्य केंद्र भी लगभग 14 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।जिससे आपात स्थिति में किसी की तबीयत खराब होने पर पैदल भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंचाया जा सकता है।बरसात के दिनों में रास्ता खराब होने के कारण किसी के बीमार पड़ने पर चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध नहीं हो सकती है ।और नजदीक अस्पताल तक मरीज को ले जाना हिमालय पर चढ़ने के समान है। किंतु बरसों से उपेक्षित यह गांव आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।इस क्षेत्र के ग्रामीण आज भी आस और उम्मीद भरी नजर से प्रशासन की तरफ देखने को विवश है,की कब उनके क्षेत्र का कायाकल्प होगा।