भू-माफियाओं की मिलीभगत से खरवत स्थित शासकीय भूमि की रजिस्ट्री का आरोप, जांच की उठी मांग

बैकुंठपुर। कोरिया जिले के बैकुंठपुर तहसील क्षेत्र में शासकीय भूमि की कथित रजिस्ट्री का मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-43 स्थित खरवत क्षेत्र की उस भूमि से जुड़ा है, जिसे स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों पहले सरकार के अधीन लिया गया था। अब इसी भूमि की रजिस्ट्री होने का आरोप लगने से पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। जानकारी के अनुसार, संबंधित भूमि को वर्ष 1954-55 में शासन द्वारा अधिग्रहित किया गया था और उस समय प्रभावित भूमि स्वामियों को मुआवजा भी प्रदान किया गया था। इसके बावजूद अब उक्त भूमि पर निजी स्वामित्व दर्शाकर उसकी खरीद-बिक्री किए जाने का दावा किया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही अथवा अनियमितता का मामला हो सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-माफियाओं और कुछ विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण शासकीय भूमि की रजिस्ट्री संभव हो रही है। उनका कहना है कि पूर्व में भी ऐसे मामलों की शिकायतें की गई थीं, लेकिन अधिकारियों के तबादले के बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं, सुशासन तिहार के दौरान की गई शिकायतों पर भी अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने की बात कही जा रही है।

चौहद्दी व्यवस्था बंद होने के बाद बढ़ी आशंका

जानकारों का कहना है कि भूमि की चौहद्दी (सीमा सत्यापन) की प्रक्रिया में बदलाव के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेज हुई है। इससे आम नागरिकों को राहत तो मिली है, लेकिन आरोप है कि इसी का लाभ उठाकर कुछ लोग शासकीय भूमि की भी रजिस्ट्री कराने में सफल हो रहे हैं।

रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका पर उठे सवाल

मामले में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या संबंधित भूमि की रजिस्ट्री राजस्व अभिलेख (मिसल), रिकॉर्ड और स्वामित्व की विधिवत जांच के बाद की गई थी या नहीं। यदि आवश्यक अभिलेखों का परीक्षण किए बिना रजिस्ट्री हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग पर टिकी हैं। यदि जांच में शासकीय भूमि की अवैध रजिस्ट्री की पुष्टि होती है, तो संबंधित रजिस्ट्री निरस्त करने के साथ-साथ दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।