धान खरीदी के दावों की पोल खुली! धान नहीं बिकने से टूटे किसान ने किया जहर सेवन, प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल.

CITIUPDATE NEWS(संतोष सारथी)प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन द्वारा धान खरीदी को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों के बीच कोरबा जिले से एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। धान नहीं बिकने और लगातार टालमटोल से परेशान एक किसान ने आत्महत्या की नीयत से जहर का सेवन कर लिया। गंभीर हालत में किसान को आनन-फानन में जिला अस्पताल कोरबा में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित किसान सुमेर सिंह, ग्राम पुटा, हरदीबाजार का निवासी है। बताया जा रहा है कि किसान पिछले एक महीने से अपना धान बेचने के लिए भटक रहा था, लेकिन न तो उसका धान खरीदा गया और न ही उसे खरीदी का टोकन उपलब्ध कराया गया। आरोप है कि फड़ प्रभारी द्वारा उसे लगातार आज-कल कहकर घुमाया जा रहा था। हताश होकर किसान ने पूर्व जनदर्शन में भी अपनी पीड़ा रखी, लेकिन वहां से भी उसे कोई ठोस समाधान नहीं मिला। अंततः प्रशासनिक उदासीनता और व्यवस्था की मार से टूटकर किसान ने जहर का सेवन कर लिया।घटना की जानकारी मिलते ही कोरबा प्रवास पर रहीं सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत जिला अस्पताल पहुंचीं और पीड़ित किसान से मुलाकात कर उसकी स्थिति की जानकारी ली।

बड़ा सवाल? जब प्रदेश सरकार से लेकर जिला प्रशासन तक धान खरीदी को लेकर करोड़ों के आंकड़े और सफल व्यवस्था के दावे किए जा रहे हैं, तो फिर आखिर क्यों एक किसान को अपनी जान देने की नौबत आ रही है? क्या धान खरीदी व्यवस्था सिर्फ कागजों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई जवाबदेही तय होगी? यह घटना न सिर्फ धान खरीदी व्यवस्था की सच्चाई उजागर करती है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।