आबकारी विभाग व पुलिस क्यों चुप ?.....यह रिश्ता क्या कहलाता है!

� � � � ✍️ �अमित दशोरा. स्वतंत्र पत्रकार
उदयपुर।
राज्य सरकार के आदेशों को ताक पर रखकर उदयपुर शहर से सटे हाईवे और बाहरी क्षेत्रों में रात 8 बजे के बाद भी शराब की अवैध बिक्री बेरोकटोक जारी है। नियमों के अनुसार इस समय सभी शराब ठेके बंद होने चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई ठेके केवल दिखावे के लिए बंद होते हैं, जबकि अंदरखाने कारोबार चलता रहता है।
सूत्रों के अनुसार शहर के उत्तर-दक्षिण हाईवे कॉरिडोर, औद्योगिक क्षेत्र से लगे मार्ग और बाहरी बाइपास बेल्ट में स्थित कुछ ठेके रात होते ही शटर गिरा लेते हैं, लेकिन पीछे के रास्तों, इशारों और वाहनों के जरिए शराब बेची जाती है। यह सिलसिला रोज़ का बन चुका है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हाईवे पर शराब की इतनी आसान उपलब्धता से नशे में वाहन चलाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार मंडरा रहा है, लेकिन आबकारी विभाग और पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है, तो जिम्मेदार विभागों को यह क्यों नहीं दिखता? क्या यह लापरवाही है या फिर किसी तरह का संरक्षण?
राज्य सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि 8 बजे के बाद शराब बेचने पर लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई होगी, लेकिन उदयपुर में यह आदेश सिर्फ कागज़ों तक सीमित दिखाई दे रहा है।

प्रशासन दे जवाब�
जब 8 बजे के बाद शराब बिक्री पूरी तरह अवैध है, तो हाईवे इलाकों में रोज़ रात यह कारोबार कैसे चल रहा है?
क्या आबकारी विभाग और पुलिस द्वारा नियमित रात्रि जांच की जा रही है या नहीं?
अब तक कितने ठेकों के खिलाफ कार्रवाई हुई और कितनों के लाइसेंस निलंबित किए गए?
यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
शहरवासियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि हाईवे और बाहरी क्षेत्रों में तुरंत विशेष अभियान चलाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि कानून का पालन हो और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।