स्टेशनों और ट्रेनों में सुरक्षित पेयजल के लिए मध्य रेलवे ने तेज किए इंतजाम

मुंबई। पेयजल की गुणवत्ता को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के बाद रेलवे ने यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा वरिष्ठ रेलवे बोर्ड अधिकारियों की समीक्षा के बाद भारतीय रेलवे में सुरक्षित पेयजल व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में मध्य रेलवे ने अपने पूरे नेटवर्क में जलापूर्ति, जल शोधन, गुणवत्ता जांच और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन में मध्य रेलवे द्वारा स्टेशनों, कोचिंग डिपो और यात्रियों से जुड़े अन्य स्थानों पर पेयजल व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा रही है। रेलवे नेटवर्क में करीब 20 हजार स्थानों पर नए जल शोधन संयंत्र, वाटर कूलर और जल गुणवत्ता की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाएं स्थापित करने की योजना है। इसके साथ ही पुराने और जर्जर जल भंडारण टैंकों को चिन्हित कर चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है।

पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोत और पानी के निकास बिंदुओं पर नियमित जांच, केंद्रीकृत निगरानी तथा जल भंडारण टैंकों की निर्धारित समय पर सफाई और रखरखाव को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इससे यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था और मजबूत होगी।

मध्य रेलवे ने सीएजी की वर्ष 2023-24 में मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला स्टेशनों से लिए गए पेयजल नमूनों से संबंधित टिप्पणियों के बाद विशेष अभियान चलाया। चारों स्टेशनों से पानी के नमूने लेकर भौतिक, रासायनिक और जीवाणु संबंधी जांच कराई गई। जांच में सभी नमूने संतोषजनक पाए गए तथा किसी भी नमूने में ई. कोलाई या जीवाणु संबंधी संदूषण नहीं मिला।

इसके अलावा चारों स्टेशनों पर जल पाइपलाइन व्यवस्था की पूरी जांच कर रिसाव को दूर करने के कदम उठाए गए। टैंकों के वेंट और ओवरफ्लो व्यवस्था पर जाली सहित मजबूत ढक्कन लगाए गए। वाटर कूलरों की जांच और सफाई कर उनमें जमा गाद को हटाया गया। जहां नल में रिसाव पाया गया, वहां उन्हें बदला गया तथा जिन स्थानों पर नल उपलब्ध नहीं थे, वहां नए नल लगाए गए।

पेयजल की नियमित जांच को और प्रभावी बनाने के लिए संबंधित निर्माण निरीक्षक कार्यालयों में ई. कोलाई जांच किट भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच की जा सके।

मध्य रेलवे के अनुसार विशेष अभियान के तहत की गई नवीनतम जांच में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला स्टेशनों पर यात्रियों को वर्तमान में उपलब्ध कराया जा रहा पेयजल सुरक्षित और पीने योग्य पाया गया है। रेलवे बोर्ड स्तर पर इन व्यवस्थाओं की प्राथमिकता के आधार पर निगरानी की जा रही है। जल गुणवत्ता और सुधार कार्यों की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट समय-समय पर जारी की जाएगी, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला ने बताया कि यह पहल यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने और भारतीय रेलवे में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल व्यवस्था को और मजबूत करने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है।