विद्वत् जनकल्याण समिति के श्रावणी उपाकर्म में सनातन संस्कृति संरक्षण का आह्वान

*जाने-अनजाने हुए पापों के परिमार्जन का वैदिक विधान है श्रावणी उपाकर्म: पंडित बृजेश पाण्डेय*

गोरखपुर। विद्वत् जनकल्याण समिति के तत्वावधान में प्राचीन मानसरोवर मन्दिर पोखरा पर श्रावणी उपाकर्म एवं सप्तऋषि पूजन का धार्मिक एवं वैदिक आयोजन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष पं. रविन्द्रनाथ मिश्र ने की तथा संचालन ज्योतिषाचार्य पं. बृजेश पाण्डेय द्वारा किया गया। वैदिक आचार्य पं. अरविन्द पाण्डेय एवं समिति के क्षेत्रीय अध्यक्ष डा. राजेन्द्र शुक्ल के निर्देशन में समस्त अनुष्ठान वैदिक-विधि से सम्पन्न कराया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ पंचगव्य प्राशन से हुआ। तत्पश्चात आचमन एवं प्राणायाम के साथ हेमाद्रि संकल्प कराया गया। श्रद्धालुओं एवं विद्वानों ने परंपरानुसार दशविधि स्नान किया,जिसमें मिट्टी,भस्म, गोबर आदि का प्रयोग किया गया। इसके बाद दूर्वा, कुशा एवं चिचिहिड़ा आदि से मार्जन की वैदिक प्रक्रिया सम्पन्न हुई। गायत्री मंत्र के जप के साथ सूर्योपासना की गई तथा स्नान के उपरांत कश्यप आदि सप्तऋषियों एवं माता अरुंधती का षोडशोपचार पूजन विधिपूर्वक किया गया।
अनुष्ठान के अगले चरण में यज्ञोपवीत का पूजन कर विधिपूर्वक यज्ञोपवीत धारण कराया गया। तत्पश्चात चंदन तिलक एवं रक्षाबंधन की धार्मिक परंपरा निभाते हुए कार्यक्रम का समापन हुआ। महामंत्री पं. बृजेश पाण्डेय ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और वर्षभर में जाने-अनजाने मे हुए पापों के प्रायश्चित एवं परिमार्जन का महत्वपूर्ण वैदिक विधान है। यह पर्व हमें ऋषियों, गुरुओं और अपनी सनातन ज्ञान परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी परंपरा और शास्त्रीय विधि के अनुसार श्रावणी उपाकर्म कर जीवन में सत्य, संयम, सदाचार और सेवा का संकल्प लेना चाहिए। इससे हमारी वैदिक संस्कृति और संस्कारों की परंपरा भी भावी पीढ़ी तक सुरक्षित रूप से पहुंचती रहेगी। इस अवसर पर अन्य विद्वाजनो ने भी श्रावणी उपाकर्म के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी परंपराएं नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और वैदिक जीवन-पद्धति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
कार्यक्रम में पं. रविन्द्र नाथ मिश्र, पं. बृजेश पाण्डेय, पं. अश्विनी कुमार मिश्र, पं. नवरत्न दूबे, पं. राजेश कुमार मिश्र, पं. शेषमणि पाण्डेय, पं. रमेश पाण्डेय, पं. वैद्यनाथ द्विवेदी, पं. मनोज तिवारी, पं. अश्वनी त्रिपाठी, पं. डा. दीपनारायण शुक्ल, पं. डा. राजेन्द्र शुक्ल, डा. कुलदीप पाण्डेय, पं. राजीव मिश्र, पं. आकाश शुक्ला,पं. सुनील मणि त्रिपाठी, पं. ब्रह्मानंद मिश्र, पं. राघवेन्द्र तिवारी, पं. मानवेन्द्र मोनू पाण्डेय, पं. गंगेश्वर पाण्डेय, पं. रामसूचित उपाध्याय, पं. गणेश तिवारी, पं. अरुणेश मिश्र, पं. रामचंद्र शुक्ल, पं. बलिराम पाण्डेय दरोगा, अम्बुज मिश्र, पं. राधाकृष्ण पाठक, पं. विपुल पाण्डेय, पं. हर्षित उपाध्याय, पं. धर्मेन्द्र तिवारी गीतावाटिका, पं. सोनू मिश्र एवं पं. महेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में विद्वत्जन्एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।