महाराजा अग्रसेन जी की 5150वीं जयंती पर इगलास में निकलेगी भव्य शोभायात्रा

-श्री अग्रवाल युवा सेवा समिति के तत्वावधान में 14 अक्टूबर को आयोजित होंगे विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम

अलीगढ़। अग्रसमाज के प्रवर्तक, समाजवाद के अग्रदूत और महान सम्राट महाराजाधिराज श्री श्री 1008 श्री अग्रसेन जी महाराज की 5150वीं पावन जयंती के शुभ अवसर पर आगामी 14 अक्टूबर (बुधवार) को इगलास नगर में एक विशाल एवं भव्य शोभायात्रा तथा जयंती समारोह का आयोजन बड़े हर्षोल्लास व धूमधाम के साथ किया जाएगा। इस धार्मिक एवं सामाजिक महोत्सव को लेकर श्री अग्रवाल युवा सेवा समिति, इगलास द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम के संबंध में समिति द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

प्रेस वार्ता के दौरान समिति के अध्यक्ष डा. लव मित्तल ने बताया कि समारोह मथुरा रोड स्थित शाहपुरिया बगीची, राधा कृष्ण मंदिर परिसर से आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत सायं चार बजे भव्य शोभायात्रा के साथ होगी। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। महाराजा अग्रसेन जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन अर्चन होगा तथा महाआरती का आयोजन किया जाएगा। जिसमें समाज के लोग भाग लेंगे। शोभायात्रा में महाराजा अग्रसेन जी के साथ 18 राजकुमार के स्वरुप भी शामिल होंगे। मां लक्ष्मी व मां सरस्वती के स्वरुपों के साथ अन्य झांकियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी।

शोभायात्रा का निर्धारित मार्ग

भव्य झांकियों और बैंड-बाजों से सुसज्जित यह शोभायात्रा बगीची मंदिर (मथुरा रोड) से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों अलीगढ़ रोड, पुरानी तहसील रोड, गौंडा रोड (पथवारी मंदिर), सासनी रोड और हाथरस रोड से होते हुए अपने निर्धारित गंतव्य पर पहुंचकर संपन्न होगी। शोभायात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत की तैयारियां भी की जा रही हैं। समिति ने समस्त अग्रबंधुओं और क्षेत्रीय नागरिकों से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर सपरिवार उपस्थित होकर भव्य शोभायात्रा की शोभा बढ़ाएं और कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाएं।

एक रुपया और एक ईंट के सिद्धांत का संदेश

कार्यक्रम के संदर्भ में जानकारी देते हुए श्री अग्रवाल युवा सेवा समिति के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. लव मित्तल, हरीश अग्रवाल, रूपेश गोयल, निरपेक्ष गोयल, प्रवेश अग्रवाल, उत्सुक गोयल, तुषार जिंदल एवं ध्रुव अग्रवाल ने संयुक्त रूप से बताया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि महाराजा अग्रसेन जी के लोककल्याणकारी आदर्शों को पुनर्जीवित करने का माध्यम है। महाराजा अग्रसेन जी का एक रुपया और एक ईंट का सिद्धांत समाज में बंधुत्व, समानता और परस्पर सहयोग की भावना का प्रतीक है।