मराठी फ़िल्म इंडस्ट्रीज के असितत्व को बचाने कलाकार करेंगे आंदोलन

मराठी फ़िल्म इंडस्ट्रीज के असितत्व को बचाने के लिए आंदोलन, कलाकार मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़गवीस से करेंगे मुलाक़ात मुंबई ( गिरजा शंकर अग्रवाल ) - मराठी फ़िल्म इंडस्ट्रीज बचाव आंदोलन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने आहिल्या नगर जिला के जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सम्बोधित ज्ञापन महाराष्ट्र के करीब छत्तीस जिलों में जिलाधिकारिओ को ज्ञापन सौपा गया! जिसमे कहा गया है कि प्रतिवर्ष करीब एक सौ फिल्मों का निर्माण होता है, लेकिन मात्र तीन - चार फ़िल्में ही रिलीज हो पाती है! मराठी फिल्मों का निर्माण बहुत कम होता जा रहा है! जिससे मराठी कलाकार भुखमरी के कगार पर आते जा रहें है! मराठी फिल्मों का अस्तित्व को पूर्णतःआ बनाये रखने के लिए मराठी फ़िल्म निर्माण के लिए फ़िल्म निर्माताओं, निर्देशकों तकनीशियनों तथा कलाकारों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं की शख्त आवश्यकता है! जिससे ज्यादा से ज्यादा मराठी फिल्मों का निर्माण हो सके! और कलाकारों को नियमित रोजगार मिल सके! तथा सरकार को चाहिए कि मराठी फिल्मों को थिएटर में कम से कम एक सप्ताह तक लगी रहने से अनिवार्य होनी चाहिए! जिससे मराठी फिल्मों कि लोकप्रियता बढ़ेंगी! दर्शकों का मराठी फिल्मों को देखने का रुझान भी बड़ेगा! तथा फ़िल्म निर्माताओं को मराठी कलाकारों को नियमित काम देने कि अनिवार्यता होनी चाहिए! जिससे मराठी कलाकारों के परिवार का भरण पोषण हो सकें! जैसे तैसे मराठी कलाकारों को फ़िल्म, बेबसीरीज, वर्टिकल, म्यूजिक एल्बम में काम मिलता है! समय से पेमेंट न होने से उनका मानसिक शोषण होता है! जिस कारण परिवार कि स्थिति ढ़गमगा जाती है! सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सरकार से अनुरोध किया है! कलाकारों का नियमित रोजगार देने के लिए ऐसी गाइड लाइन बनानी चाहिए! तथा कलाकारों का मानसिक शोषण रोका जाना चाहिए तथा समय से कलाकारों का भुगतान कराना जाना चाहिए! पदाधिकारियों ने बताया कि जल्द ही मराठी चित्रपट सृष्टि बचाने के लिए आंदोलन मुंबई में किया जायेगा! ज्ञापन देने में बाला साहेब वराले, पुष्पा परते, सुनीता सोनावाने, राजेश मंचरे, मोहम्मद अनिस , संजय गायकवाड, आयुब आतार, गोरख पाढरे, बाळासाहेव बंसोड़े, अनिल सकट, शंकर डुकरे, ताराचंद्र विटनोर, भारत थोरात आदि के हस्ताक्षर थे!