दलितों को ज्ञान देने से पहले तेजस्वी यादव अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व का हिसाब दें : डॉ. संतोष कुमार सुमन

पटना,बिहार सरकार के मंत्री एवं हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने तेजस्वी यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आरक्षण और सामाजिक न्याय पर लंबा भाषण देने से पहले तेजस्वी यादव को समाज के सबसे वंचित दलितों के सवालों का जवाब देना चाहिए। हम आरक्षण समाप्त करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की बात कर रहे हैं कि उसका लाभ समाज के सबसे पीछे खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। केवल आरक्षण का प्रतिशत बढ़ा देना ही सामाजिक न्याय नहीं है। असली सवाल यह है कि आरक्षण का लाभ किन लोगों तक पहुंच रहा है और जो जातियां व समुदाय आज भी शिक्षा, नौकरी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सबसे पीछे हैं, उन्हें उनका उचित हिस्सा कब मिलेगा? तेजस्वी यादव पहले यह बताएं कि उनकी पार्टी ने आज तक सामान्य सीटों पर कितने दलितों को टिकट दिया है? कितने दलित नेताओं को गैर-आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ाकर विधानसभा और लोकसभा में भेजा है? अगर सामान्य सीटों पर दलितों को अवसर नहीं दिया गया, तो क्यों नहीं दिया गया? सामाजिक न्याय का मतलब दलितों को केवल आरक्षित सीटों तक सीमित रखना नहीं है।

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि तेजस्वी यादव आज 75 प्रतिशत आरक्षण और सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि जिस राज्यसभा में कोई सीट दलितों के लिए आरक्षित नहीं है, वहां उनकी पार्टी ने कितने दलित नेताओं को सांसद बनाकर भेजा है? विधान परिषद में किस मांझी, डोम, नट, हलखोर अथवा अन्य सबसे वंचित समुदाय के व्यक्ति को प्रतिनिधित्व दिया गया है? जिन वर्षों में बिहार की राजनीति और सत्ता पर सामाजिक न्याय का दावा करने वालों का प्रभाव रहा, उस दौरान सबसे वंचित दलित और महादलित समुदायों की शिक्षा, सरकारी नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वास्तविक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? आखिर एक ही आरक्षित श्रेणी के भीतर अपेक्षाकृत आगे बढ़ चुके और आज भी सबसे पीछे खड़े समुदायों के बीच की असमानता पर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए? हम किसी का हक छीनने की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने हक के भीतर अपना उचित हिस्सा मांग रहे हैं। दलितों को प्रतिनिधित्व किसी बाप-बेटे या किसी राजनीतिक परिवार की कृपा से नहीं मिला है, बल्कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान और संवैधानिक अधिकारों के कारण मिला है। इसलिए ज्ञान देने के बजाय तेजस्वी यादव को तथ्यों और आंकड़ों के साथ जवाब देना चाहिए।

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि हमें ज्ञान नहीं चाहिए, जवाब चाहिए; भाषण नहीं, आंकड़े चाहिए; सहानुभूति नहीं, अधिकार चाहिए। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें सबसे कमजोर और वंचित व्यक्ति तक अवसर और अधिकार समान रूप से नहीं पहुंच पा रहे हैं। तेजस्वी यादव यदि वास्तव में गरीबों और वंचितों की चिंता करते हैं तो उन्हें बताना चाहिए कि सबसे वंचित समुदायों की सरकारी नौकरियों, उच्च शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में हिस्सेदारी कितनी है और उसे बढ़ाने के लिए उनकी ठोस योजना क्या है? केवल बड़ी-बड़ी बातें और चुनावी राजनीति से सामाजिक न्याय नहीं होगा। अब समाज जवाब मांग रहा है कि जो सबसे पीछे हैं, उन्हें उनका हिस्सा कब मिलेगा। आरक्षण रहेगा और मजबूत रहेगा, लेकिन उसका लाभ समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक भी पहुंचना चाहिए। हमारी लड़ाई बिल्कुल स्पष्ट है?जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी और सबसे वंचित को उसके कोटे में उसका उचित हिस्सा। अब ज्ञान बहुत हो गया, अब हिसाब चाहिए।