तहसीलदार और हल्का पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल, शासकीय भूमि के नियम विरुद्ध हस्तांतरण का आरोप

बैकुंठपुर। जिला मुख्यालय में जमीनों के हेरफेर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ भू माफियाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तत्कालीन तहसीलदार ने हल्का पटवारी के साथ मिलीभगत कर शासकीय एवं आहस्तांतरणीय भूमि के संबंध में नियमों को दरकिनार करते हुए आदेश पारित किए, जिसके बाद उक्त भूमि की रजिस्ट्री कराए जाने का रास्ता साफ हुआ स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, कुछ ऐसी जमीनें जो राजस्व अभिलेखों में शासकीय अथवा आहस्तांतरणीय प्रकृति की बताई जा रही हैं, उनके संबंध में तहसील कार्यालय में प्रक्रिया अपनाकर आदेश जारी किए गए। इसके बाद संबंधित भूमि का पंजीयन होने की बात कही जा रही है। पूरे मामले में तत्कालीन तहसीलदार और संबंधित हल्का पटवारियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजस्व रिकॉर्ड और आदेशों की जांच की जरूरत

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भूमि वास्तव में शासकीय अथवा आहस्तांतरणीय थी, तो उसके हस्तांतरण एवं रजिस्ट्री की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ी? क्या संबंधित अधिकारियों ने भूमि की प्रकृति और राजस्व अभिलेखों की पूरी जांच की थी? यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित जमीनों के पुराने एवं वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड, तहसील कार्यालय से जारी आदेश, नामांतरण प्रक्रिया तथा रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।

जांच के बाद सामने आ सकता है पूरा सच

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन एवं वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों से पूरे मामले की जांच की मांग उठ रही है। यदि जांच में नियम विरुद्ध तरीके से शासकीय या आहस्तांतरणीय भूमि के हस्तांतरण की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित तत्कालीन तहसीलदार एवं हल्का पटवारी का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।