डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से बदली माल ढुलाई की तस्वीर, उत्तर प्रदेश बना प्रमुख केंद्र

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से बदली माल ढुलाई की तस्वीर, उत्तर प्रदेश बना प्रमुख केंद्र

2,843 किलोमीटर लंबे नेटवर्क से बढ़ी माल परिवहन की रफ्तार और क्षमता, यात्री रेल लाइनों पर भी घटा दबाव

प्रयागराज। भारत के माल परिवहन तंत्र में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने बड़ा बदलाव ला दिया है। यात्री रेल लाइनों से मालगाड़ियों को अलग कर विकसित किए गए करीब 2,843 किलोमीटर लंबे उच्च क्षमता वाले नेटवर्क के कारण माल की ढुलाई तेज, सुरक्षित और अधिक भरोसेमंद हुई है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बढ़ते परिचालन का सीधा लाभ उद्योग, कृषि, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मिल रहा है।

देश में संचालित दो प्रमुख मालवाहक गलियारों में 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शामिल हैं। यह नेटवर्क भारतीय रेल के कुल नेटवर्क का करीब चार प्रतिशत होने के बावजूद रेल माल ढुलाई में 14 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी निभा रहा है।

कोयले से लेकर कंटेनर तक तेज हुई ढुलाई

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर कोयला, लोहा-इस्पात, उर्वरक, खाद्यान्न, कृषि उत्पाद, पेट्रोलियम पदार्थ, सीमेंट, क्लिंकर और ऑटोमोबाइल जैसी प्रमुख वस्तुओं की ढुलाई हो रही है। वहीं वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, टाइल्स और अन्य उच्च मूल्य वाले सामान के साथ-साथ कोयला, स्टील, खाद्यान्न, सीमेंट और ऑटोमोबाइल जैसे माल का भी परिवहन किया जा रहा है।

वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर ट्रक ऑन ट्रेन सेवा के जरिए दूध परिवहन और संयुक्त पार्सल उत्पाद-रैपिड कार्गो सेवा के माध्यम से समय-संवेदी ई-कॉमर्स एवं पार्सल यातायात जैसी नई लॉजिस्टिक्स सेवाओं को भी बढ़ावा मिला है।

उत्तर प्रदेश बना डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र

उत्तर प्रदेश डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। राज्य में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का करीब 1,078 किलोमीटर हिस्सा है, जो किसी भी राज्य में सबसे लंबा हिस्सा है। वहीं पश्चिमी गलियारे का भी 19 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में आता है।

ग्रेटर नोएडा का दादरी क्षेत्र प्रमुख लॉजिस्टिक्स गेटवे के रूप में विकसित हो रहा है। यहां से उत्तर भारत के प्रमुख उपभोग केंद्रों को पश्चिमी समुद्री बंदरगाहों, विशेषकर जेएनपीटी, से सीधा संपर्क मिल रहा है।

वहीं ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों को कृषि एवं उत्पादन क्षेत्रों से जोड़ रहा है। इससे कोयला, स्टील और उर्वरक जैसे कच्चे माल की आपूर्ति तथा तैयार उत्पादों के वितरण में तेजी आई है।

उत्तर मध्य रेलवे को भी मिला बड़ा फायदा

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के परिचालन से उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल को भी माल ढुलाई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ मिल रहा है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से आईसीडीजी और आईसीडीडी से कंटेनर लोडिंग में वृद्धि हुई है, जिससे आय में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पीबीसीपी टर्मिनल से चालू वित्त वर्ष में 251 रेक लोड किए गए, जो करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं न्यू दादरी से संयुक्त पार्सल उत्पाद-रैपिड कार्गो सेवा के तहत प्रतिदिन करीब 10 वीपी की लोडिंग हो रही है, जिससे प्रयागराज मंडल को रोजाना लगभग 10 लाख रुपये की आय हो रही है।

डीएफसी के कारण मंडल के पावर प्लांट तक कोयले की आपूर्ति तेज और अधिक भरोसेमंद हुई है। इसके अलावा अनाज की लोडिंग बढ़ने से चालू वित्त वर्ष में इससे होने वाली आय में करीब 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

यात्री ट्रेनों को भी मिली राहत

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का एक बड़ा फायदा यह है कि मालगाड़ियों को अलग मार्ग मिलने से मौजूदा रेलवे नेटवर्क पर दबाव कम हुआ है। इससे यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हुई है और समय पालन तथा परिचालन क्षमता में सुधार की संभावना बढ़ी है।

बंदरगाहों तक कंटेनर पहुंचने में लगने वाला समय कम होने से उद्योगों को तेज और प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स सुविधा मिल रही है। कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद और अन्य भारी सामान की ढुलाई भी अधिक सुगम हुई है।

अगस्त 2026 तक 5.21 लाख से अधिक मालगाड़ी यात्राएं

अगस्त 2026 तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क पर 5.21 लाख से अधिक मालगाड़ी यात्राएं पूरी की जा चुकी हैं। इस नेटवर्क पर प्रतिदिन औसतन करीब 435 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। अब तक नेटवर्क ने 658 अरब ग्रॉस टन किलोमीटर और 360 अरब नेट टन किलोमीटर का परिचालन दर्ज किया है।

डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों और अधिक क्षमता वाले माल परिवहन से प्रति टन परिवहन लागत को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक समयबद्ध बनाने में मदद मिल रही है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का पूरा परिचालन विद्युतीकृत रेल व्यवस्था पर आधारित है। इससे डीजल की खपत कम होने के साथ सड़क मार्ग से भारी माल ढुलाई का दबाव भी घट रहा है। अनुमान के अनुसार, इसके चलते अगले 30 वर्षों में करीब 477 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है।

इस तरह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर केवल माल ढुलाई को तेज करने वाली परियोजना नहीं, बल्कि भारत की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था, औद्योगिक विकास, यात्री रेल क्षमता और पर्यावरणीय स्थिरता को एक साथ मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा बनकर उभर रहा है। उत्तर प्रदेश इस परिवर्तन में एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी मजबूत भूमिका निभा रहा है।