कन्या विवाह योजना के टेंट भुगतान पर उठे सवाल, समूह के कामकाज और बिल की जांच की मांग

बैकुण्ठपुर। सूत्रों की माने तो महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना कार्यालय बैकुण्ठपुर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के कार्यक्रम से जुड़े टेंट भुगतान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्राम खाड़ा, पोस्ट महोरा, जिला कोरिया की संतोषी महिला स्वयं सहायता समूह के नाम से करीब 1 लाख 60 हजार रुपये का टेंट संबंधी बिल लगाए जाने की जानकारी सामने आई है मामले में स्थानीय स्तर पर समूह से संपर्क किए जाने पर कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि समूह टेंट लगाने का कार्य नहीं करता है। वहीं मोबाइल के माध्यम से समूह से जानकारी लेने पर कथित रूप से यह बताया गया कि परियोजना अधिकारी की ओर से समूह से बिल मांगा गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में मूल दस्तावेजों और भुगतान अभिलेखों की जांच आवश्यक मानी जा रही है।

बिल में हस्ताक्षर, जीएसटी और बैंक विवरण को लेकर भी सवाल

बताया जा रहा है कि संबंधित बिल में समूह के अध्यक्ष एवं सचिव के हस्ताक्षर को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। इसके अलावा बिल में जीएसटी से संबंधित आवश्यक विवरण नहीं होने, समूह का पता गलत दर्ज किए जाने तथा बैंक खाता नंबर में त्रुटि होने के आरोप लगाए गए हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो शासकीय भुगतान प्रक्रिया की गंभीरता से जांच की आवश्यकता होगी।

बाजार मूल्य की तुलना में भुगतान राशि पर उठे सवाल

मामले का एक प्रमुख बिंदु टेंट सामग्री एवं सेवा के वास्तविक बाजार मूल्य और भुगतान की गई राशि के बीच संभावित अंतर को लेकर है। आरोप है कि बाजार मूल्य की तुलना में अधिक राशि का बिल प्रस्तुत कर शासकीय राशि का भुगतान किया गया। हालांकि, वास्तविक अंतर की पुष्टि के लिए टेंडर/कार्यादेश, बिल, भुगतान वाउचर, बाजार दर तथा कार्यक्रम में लगाए गए टेंट की वास्तविक व्यवस्था का मिलान जरूरी होगा।

पूरे दस्तावेजों की जांच की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसे महत्वपूर्ण शासकीय कार्यक्रम में भुगतान प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार की शिकायत सामने आती है तो विभाग को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। लोगों ने संबंधित बिल, कार्यादेश, भुगतान स्वीकृति, बैंक विवरण, वास्तविक टेंट व्यवस्था तथा स्वयं सहायता समूह के दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

पूर्व शिकायत की जांच लंबित होने का भी दावा

इसके अलावा विभाग से जुड़े शासकीय वाहन के संबंध में पूर्व में मुख्यमंत्री के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त शिकायत की जांच अब तक पूरी नहीं हुई है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि अन्य मामलों में शिकायतों की जांच जल्द हो जाती है, लेकिन इस मामले में जांच लंबित क्यों है।फिलहाल टेंट भुगतान से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मूल बिल, कार्यादेश, भुगतान अभिलेख, बैंक विवरण और संबंधित स्वयं सहायता समूह के दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद खबर का दूसरा पक्ष भी स्पष्ट होगा।