पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं के संघर्ष की कहानी पुरूष का हुआ मंचन,संभागीय नाट्य समारोह अनुकृति रंगमंडल कानपुर की सशक्त प्रस्तुति

बहराइच। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में जन सांस्कृतिक एवं सामाजिक विकास संस्थान बहराइच के सहयोग से 19 से 22 जनवरी 2023 तक स्व. ठाकुर हुकुम सिंह किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय के जिम्नेजियम हाल में आयोजित होने वाले संभागीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन शुक्रवार को देर शाम अनुकृति रंगमंडल कानपुर द्वारा पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं के संघर्ष की कहानी ??पुरूष?? नाटक के मामध्य से बेहद प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया गया है।
मराठी के प्रसिद्ध लेखक जयवंत दलवी इस नाटक का प्रथम मंचन विजया मेहता के निर्देशन में 22 सितंबर 1982 को शिवाजी मंदिर मुंबई में हुआ था। इस मंचन में चंद्रकांत गोखले, रीमा लागू, ऊषा नाडकर्णी, सोनाली जोशी, सतीश पुलेकर जैसे मराठी के दिग्गज कलाकारों के साथ ही फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने भी अभिनय किया। सुधाकर करकरे द्वारा नाटक के हिन्दी रूपांतरण का निशा शर्मा के निर्देशन में केडीसी सभागार में प्रस्तृतिकरण किया गया। नाटक की प्रभावशाली प्रस्तुति से नाटक देखने वाले महिलाओं के प्रति अपनी सोच में परिवर्तन लाने की कोशिश अवश्य करेंगे।
??पुरूष?? नाटक का सार यह है कि अण्णा साहब आप्टे एक आदर्श शिक्षक हैं। उनके अपनी पत्नी तारा के साथ वैचारिक मतभेद होते हैं मगर फिर भी वह उनका साथ देती हैं। अण्णा की बेटी अंबिका स्कूल में पढ़ाती है, उसका मित्र सिद्धार्थ दलितों के हक की लड़ाई लड़ता है अण्णा व सिद्धार्थ के बीच अक्सर नोकझोंक होती है, वहीं अंबिका की मित्र मथुरा अण्णा व तारा को कई गंभीर मुद्दों पर सलाह देती रहती है। तभी आप्टे परिवार के शांत जीवन में बवंडर की तरह दाखिल होता है बाहुबली राजनीतिज्ञ गुलाबराव जाधव। अंबिका गुलाबराय के अनैतिक कार्यों का विरोध कर चुकी है।
अंबिका को शिकस्त देने के लिए गुलाबराय कुटिल चाल चलता है। एक दिन छल से वह अंबिका को डाकबंगले बुलवाता है और उसके साथ रेप कर डालता है। मामला अदालत तक पहुंचता है मगर सत्ता व संपति की ताकत के चलते फैसला गुलाबराय के पक्ष में होता है। इससे अंबिका मन की गहराई तक आहत होती है तो अण्णा को भी आघात लगता है तारा को तो इतना गहरा सदमा लगता है कि वह खुद ही मौत को गले लगा लेती है। मुश्किलों के इस दौर में सिद्धार्थ का रवैया देख अंबिका उसे हमेशा के लिए अलविदा कह देती है वहीं मंथू अंत तक आप्टे परिवार का साथ देती है।
नाटक में मंच पर श्रीमती जोली घोष ने तारा, दीपिका सिंह ने मथुरा, राजीव तिवारी ने अण्णा साहब, शुभी मेहरोत्रा/संध्या सिंह ने अंबिका, विजय भान सिंह/दीपक राज राही ने सिद्धार्थ, सम्राट यादव ने पांडु, महेन्द्र धूरिया ने गुलाबराय जाधव, हर्षित शुक्ला ने शिवा, प्रमोद शर्मा/सुमित गुप्ता ने इंस्पेक्टर गाडगिल, एकांश पाण्डेय ने बंडा तथा संजय शर्मा ने (पार्श्व स्वर) से न्यूज़ रीडर के किरदार को निभाया। जबकि मंच के पीछे महेश जायसवाल ने रूपसज्जा, विजय भास्कर ने सगीत, कृष्णा सक्सेना ने प्रकाश संचालन, अनिल गौड़ व दीपिका सिंह ने कास्ट्यूम, विजय भास्कर व सम्राट यादव ने मंच व्यवस्था, दिशा वर्मा ने प्रस्तुति समन्वयक तथा डॉ. ओमेन्द्र कुमार व कृष्णा सक्सेना द्वारा निर्देशन में सहयोग प्रदान किया गया।
नाटक के पश्चात कन्या वैदिक गुरूकुल विद्यालय चोटीपुरा अमरोहा की छात्राओं द्वारा योगासन, सेन्ट नार्बर्ट इण्टर कालेज के छात्र-छात्राओं द्वारा देश भक्ति सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा संत पथिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा देवाश्री गणेशा गीत प्रस्तुत किया गया। जिसे मौजूद लोगों द्वारा सराहा गया। समारोह के दौरान अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह तथा अन्य बाल कलाकारों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अलावा बाल कलाकारों के उत्साहवर्धन हेतु उन्हें नकद रूप से भी पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन शिक्षक एवं कवि संतोष सिंह ने किया। इस अवसर पर विधायक नानपारा राम निवास वर्मा, जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र, पुलिस अधीक्षक प्रशान्त वर्मा, सीएमओ डॉ. एस.के. सिंह, एसडीएम सदर सुभाष सिंह व महसी के राकेश कुमार मौर्या, डिप्टी कलेक्टर डॉ. पूजा यादव, डीडीओ महेन्द्र कुमार पाण्डेय सहित, पीडी डीआरडीए पी.एन. यादव, जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पाण्डेय, सहायक निदेशक मत्स्य डॉ. जितेन्द्र कुमार सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी व खण्ड विकास अधिकारी, पूर्व प्राचार्य मेजर डॉ. एस.पी. सिंह, व्यापार मण्डल के पदाधिकारी कुलभूषण अरोड़ा, अशोक मातनहेलिया व मनीष मल्होत्रा सहित अन्य उद्यमी, गणमान्य व संभ्रान्तजन, मीडिया प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या रंगमंच प्रेमी मौजूद रहे।