जेल मंत्री द्वारा जिला कारागार कानपुर नगर का निरीक्षण तथा बंदियों के साथ संवाद

कानपुर (महेश प्रताप सिंह).सोमवार को कारागार एवं होमगार्ड्स राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मवीर प्रजापति के द्वारा जिला कारागार, कानपुर नगर का निरीक्षण किया गया तथा बंदियों के साथ संवाद किया गया। कारागार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापति कारागार पहुंचे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मृत पटल पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद कारागार के अन्दर मुलाकात स्थल पर बंदियों और उनके परिजनों से बातचीत की। इसके पश्चात् महिला बैरक का निरीक्षण किया और महिला बंदियों से संवाद किया। महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों को कपड़े और खिलौने आदि भेंट किये तथा महिला बंदियों को शाॅल वितरित किया। महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों के मनोरंजन के लिये बनाये गये पार्क का अवलोकन किया। इसके पश्चात कारागार के चक्र में बंदियों के साथ संवाद किया। कारागार मंत्री द्वारा बंदियों को प्रेरित किया गया कि वे सदैव ऐसा आचरण अपनाये ताकि एक बार जेल से रिहा होने के बाद भविष्य में उनको दुबारा कभी जेल न आना पड़े। मंत्री जी की बातों का बंदियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। बंदियों से संवाद करते हुए श्री प्रजापति द्वारा उन्हें समझाया गया कि कारागार में किसी बंदी के निरूद्ध होने पर इसका सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव उसके परिजनों पर पड़ता है। परिजनों को जिस समय अपने बेटे से कुछ सहारे की उम्मीद होती है उस समय उसके जेल चले जाने पर परिजनों को अपने जीवन निर्वाह की व्यवस्था करने के साथ-साथ अपने बेटे की जमानत कराने की भी जिम्मेदारी आ जाती है। इस प्रकार मंत्री जी ने बंदियों को समझाया कि कोई भी कार्य करने से पहले हमेशा अपने परिजन के विषय में भी सोचते रहना चाहिये ताकि उन्हें समस्याओं का सामना न करना पड़े।विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं द्वारा कारागार में निरूद्ध बंदियों के कल्याणार्थ समय-समय पर विभिन्न कार्य किये जाते रहें हैं। उन समाजसेवी संस्थाओं के सदस्यों को भी कारागार मंत्री द्वारा बंदियों के कल्याणार्थ किये जा रहे उनके कार्यो की सराहना की गयी। इस अवसर पर विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं आइडियल कानपुर एसोसिएशन, नानक वेलफेयर सोसाइटी, ह्यूमन फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराये गये 1500 कम्बल बंदियों को वितरित किये गये। समाजसेवी संस्था एसोसिएशन फाॅर प्रोटेक्शन आफ सिविल राइट्स, (एन0जी0ओ0) लखनऊ की प्रतिनिधि श्रीमती मीना सोनी द्वारा मूल सजा समाप्त हो जाने के पश्चात केवल अर्थदण्ड के व्यतिक्रम की सजा काट रहे बंदियों के अर्थदण्ड की धनराशि रूपये 9,350/-कोषागार में जमा कराई गयी। फलस्वरूप उक्त पांच बंदियों को भी कारागार मंत्री की उपस्थिति में कारागार से रिहा किया गया। रिहा होने वाले बंदियों द्वारा कारागार मंत्री से भविष्य में दुबारा अपराध न करने का वचन दिया गया।