एल्गिन चरसड़ी तटबंध की अब तक नहीं कराई गई मरम्मत

गोण्डा की लोकल खबरें, राजन कुशवाहा की यह रिपोर्ट -

बाढ़ प्रभाव के जद में आकर प्रभावित हुई धान एवम् गन्ने की फसल

फसल नुकसान देख किसानों में बेचैनी

गोण्डा। परसपुर क्षेत्र में इस बार देर समय तक बरसात एवम् बाढ़ प्रभाव रहने से कहीं कहीं पर धान एवम् गन्ने की फसलों में जलभराव होने से फसल चौपट हो गई। जिससे किसानों के जीविकोपार्जन की समस्या बढ़ गई। खेतों में जलभराव व नमी होने से धान कटाई के समय किसानों को काफी मशक्कते झेलनी पड़ रही है। वहीं गेंहू की बुवाई भी प्रभावित हुई है। गत माह सरयू घाघरा नदी के तटीय हिस्से में काफी दिनों तक जलभराव होने से किसानों का काफी नुकसान हो गया। जिससे गन्ना एवम् धान की फसल जलभराव के जद में आकर चौपट हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार अक्टूबर माह में नदियों के बाढ़ तांडव लीला से फसलों की काफी क्षति हुई है। खेतों में पानी भरा रहने से धान एवम् गन्ने की फसल खराब हो गई। जिससे किसानों को जीविकोपार्जन की समस्या बढ़ गई। बताया जा रहा है कि अक्टूबर महीने में पहाड़ी नदियों बैराजों से छोड़े गए पानी से सरयू एवम घाघरा नदियों का जलस्तर बढ़ गया था। परसपुर क्षेत्र के चरसड़ी, बहुवन, रायपुर शिवगढ़, नरायनपुर जयसिंह, नरायनपुर साल, सरैया आदि गांव के किसानों की फसल प्रभावित हो गई। ज्यादा दिनों से जलभराव में फसल खराब होता देख किसान हतप्रभ हो गए। चौपट होती फसल व जलभराव की समस्या से निजात पाने के लिए दीपावली के दरम्यान पंचवटी के समीप एल्गिन चरसड़ी तटबंध को काट दिया गया। और बाढ़ व बरसात के जलभराव को सरयू नदी में समाहित होने पर नरायनपुर जयसिंह, चरसड़ी, नरायनपुर साल, सरैया के ग्रामीणों ने राहत की सांस लिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिवर्ष बरसात व बाढ़ के समय यह समस्या झेलनी पड़ रही है। इसी स्थान पर सायफन का निर्माण हो जाए, तो किसानों को जलभराव की समस्या से निजात मिल सकता है। जिससे चरसड़ी नरायनपुर जयसिंह एवम् साल गांव में बाढ़ के पानी आसानी से सायफन के जरिए सरयू नदी में समाहित हो सके।