सरकार के नए फरमान से वक्फ़ माफियायों में हड़कंपक

सरकार के नए फरमान से वक्फ़ माफियायों में हड़कंपक

भी माफिया तो कभी दबंगई से हड़पी गई वक़्फ़ सम्पत्ति, शिकायतों के बाद भी हर बार प्रशासन रहा मौन

कहीं इमामबाड़ा ध्वस्त करके हुआ दुकानों का निर्माण तो कहीं बेंच दिया गया सहन

गोरखपुर । वक़्फ़ सम्पत्तियों को लेकर सरकार के नए फरमान से वक़्फ़ माफियाओं में हड़कंप की स्थिति है। आपको बता दें कि पूरे भारत में वक़्फ़ की सम्पत्तियां दो हिस्सों में बंटी है एक कि देखरेख सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड तो दूसरे की देख रेख शिया वक़्फ़ बोर्ड के जिम्मे है। रेलवे और सेना के बाद पूरे भारत में सबसे ज़्यादा ज़मीने वक़्फ़ की हैं। अकेले गोरखपुर जिले में ही सुन्नी और शिया वक़्फ़ बोर्ड के तहत लगभग एक हज़ार से ज़्यादा वक़्फ़ दर्ज हैं जिनकी कुल सम्पत्ति हज़ारों एकड़ में है लेकिन ये सारी वक़्फ़ संपत्तियों पर अब अपराधी और वक़्फ़ माफियायों का या तो कब्ज़ा है या फिर ऐसे लोगों की नज़र इन सम्पत्तियों पर है।
गोरखपुर में स्थित वक़्फ़ नम्बर 67 इमामबाड़ा स्टेट गोरखपुर ही नही बल्कि पूर्वांचल के सबसे बड़ा वक़्फ़ है जिसके पास आज भी हज़ारों एकड़ की सम्प्पति है।
इसके अलावा अंजुमन इस्लामिया भी बड़ा वक़्फ़ है जिसके अंतर्गत दर्जनों वक़्फ़ हैं जिनकी सम्पत्तियों का अंदाज़ लगाना मुश्किल है, ये दोनों सम्पत्तियां सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड में दर्ज है इसके अलावा शिया वक़्फ़ बोर्ड में दर्ज वक़्फ़ नम्बर 1524 वक़्फ़ अशरफुननिशा खानम के अंतर्गत गोरखपुर, कुशीनगर, सन्तकबीरनगर, सिद्धार्थनगर जिले में करोड़ों की सम्पत्ति वक़्फ़ अभिलेखों में दर्ज है जिसकी तमाम सम्पत्तियों को इसकी देख रेख की ज़िम्मेदारी सम्भालने वालों ने अपने और अपने परिवार के नाम दर्ज करा लिया और बहुत सी सम्पत्तियों को बेंच कर करोड़ों का चूना वक़्फ़ के साथ साथ सरकार को लगा दिया।
बात शाहमारूफ़ के भुआ शहीद इमामबाड़े की करें तो यहां के मुतवल्ली से मिलकर पहले माफियाओं ने इमामबाड़े को ध्वस्त किया और फिर वहां मनमानी ढंग से दुकानों का निर्माण करा दिया।
मामले की शिकायत तहसील से लेकर अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और गोरखपुर विकास प्राधिकरण तक हुई लेकिन कोई कार्यवाही अब तक नही हुई।
बात अंजुमन इस्लामिया की करें तो स्थित आज ऐसी है कि मैनेजमेंट ने इसके दरवाज़े का भी सौदा कर दिया है और छोटी छोटी दुकानों का लाखों में सौदा कर दिया। अंजुमन इस्लामिया की कमेटी के पास दर्जनों दुकाने व कई मकान हैं जिनसे सालाना लाखों की कमाई होती है लेकिन उस आमदनी का कहीं कोई हिसाब नही है।
वक़्फ़ सम्पत्तियों को लेकर समय समय पर ऐसी तमाम शिकायत हुई लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
वक़्फ़ के लुटेरे वक़्फ़ सम्पत्तियों की लूट को और आसान बनाने के लिए अपराधी और माफियाओं से भी सांठगांठ करने में हिचक नहीं रहे हैं। क्योंकि जब अपराधी और माफिया किस्म के लोग किसी संपत्ति पर अपना अधिकार और प्रभाव दिखाते हैं तो कोई भी स्थानीय नागरिक उनके सामने सिर्फ इसलिए विरोध की हिम्मत नहीं जुटा पाता कि कहीं यह माफिया किस्म के लोग उन्हें व उनके परिवार को कोई नुकसान न पहुंचा दें।
बहरहाल सरकार के वक़्फ़ सम्पत्तियों के सर्वे के आदेश के बाद ऐसी सम्पत्तियों के बचाव के साथ गुंडों बदमाशों की तर्ज पर वक़्फ़ माफियाओं के घरों पर भी बुलडोज़र चलने की उम्मीद जगी है।