बलिया जरा सी लापरवाही डेंगू को बना सकती है जानलेवा करें बचाव, रहें सतर्क- जिला मलेरिया अधिकारी।

- पहनें पूरे बांह के कपड़े, करें मच्छरदानी का प्रयोग

-घर के आस?पास रखें साफ-सफाई

- घर के पास जल जमाव न होने दें, मच्छरों के स्रोतों को करें नष्ट
बलिया, 14 सितम्बर 2022

जनपद के सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर डेंगू के इलाज की सुविधा मुफ्त उपलब्ध है। ऐसे में लक्षण दिखते ही मरीज को अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र ले जायें। डेंगू के गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है और वहां इलाज की सुविधा उपलब्ध है। यह कहना है जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव का।
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जिले में डेंगू नियंत्रण के लिए विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने अपील की है कि डेंगू से डरने की नहीं बल्कि सतर्क रहें। लक्षण नजर आते ही अगर अस्पताल की सेवाएं ली जाएं तो बीमारी गंभीर नहीं होने पाएगी। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के मरीज, गर्भवती आदि डेंगू के लक्षण दिखते ही अविलंब अस्पताल की सेवा लें। ऐसे मरीजों में डेंगू के कारण जटिलताएं बढ़ने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि वैसे तो डेंगू एक साधारण बीमारी है लेकिन इलाज में लापरवाही से यह गंभीर रूप अख्तियार कर लेती है। अगर अचानक तेज बुखार, सर दर्द, हड्डियों में दर्द के साथ आंखों के पीछे तेज दर्द हो तो मरीज को डेंगू की जांच अवश्य करानी चाहिए। बुखार की स्थिति में चिकित्सक के सलाह पर ही दवा लेनी है। दर्द निवारक एवं खून पतला करने वाली दवा का सेवन बिल्कुल नहीं करना है।
इसलिए डेंगू का लक्षण दिखने पर त्वरित इलाज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों में यह भ्रम है कि डेंगू के हर मरीज को प्लेटलेट्स की आवश्यकता होती है। किसे प्लेटलेट चढ़ना है और किसे नहीं यह संक्रमण के स्तर पर निर्भर करता है। अगर मरीज सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर आता है तो उसे प्लेटलेट चढ़ाने के लिए या गंभीर स्थिति में ही जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
उन्होंने कहा कि हर किसी प्रयास करना चाहिए कि जल जमाव न होने दें। लोग पूरे बांह के कपड़े पहनें और मच्छरदानी का इस्तेमाल नियमित करें। इसके बाद भी अगर डेंगू का लक्षण नजर आ रहा है तो तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।
उन्होंने बताया कि जिले में इस साल एक जनवरी से लेकर 14 सितम्बर तक डेंगू के कुल ग्यारह पुष्ट मामले सामने आए हैं। जिसमे तीन डेंगू के मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। आठ मरीजों का इलाज चल रहा है। जनपद में अभी तक डेंगू से किसी की मृत्यु नहीं हुई है।उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर डेंगू जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। डेंगू के लिए अलग बेड भी रिजर्व रखने का दिशा-निर्देश है। स्वास्थ्य केंद्रों पर एनएस-1 जांच में डेंगू की पुष्टि होने पर सैंपल जिला अस्पताल मंगाया जाता है और जब एलाइजा टेस्ट भी कंफर्म हो जाता है तो उसे पुष्ट डेंगू मानते हैं। निजी अस्पतालों से भी कहा गया है कि अगर उनके यहां डेंगू के मरीज निकल रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट करें ताकि शीघ्र जांच कर मरीज की पुष्टि की जा सके। जहां कहीं से भी डेंगू के केस निकलने की सूचना प्राप्त हो रही है, वहां मच्छरों के स्रोतों को नष्ट करने की कार्यवाही भी की जा रही है।