पतंगों का त्योहार मकर संक्रांति में पतंग उड़ाकर हर्षोल्लित हुए इंडस पब्लिक स्कूल दीपका के छात्र मकर संक्रांति एवं पोंगल पर्व पर इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में वर्चुअली हुए विविध कार्यक्रम,

सपनों को लेकर मन में उड़ाएंगे पतंग आसमान में ऐसी भरेगी उड़ान मेरी पतंग जो भर देगी जीवन में खुशियों की तरंग,

कोरबा - भारत त्योहारों का देश है हर त्योहार का अपना अलग महत्व है । इन्हीं त्योहरों में से एक त्योहार है मकर संक्रांति, सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, ज्योतिष में इस घटना को संक्रांति कहते हैं । मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है । इस अवसर को देश के अलग-अलग प्रंतों में अलग-अलग त्योहार के रूप में मनाता है । मकर संक्रांति का त्योहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है । इसे पतंगों का त्योहार भी कहते हैं । इस दिन बच्चे रंग-बिरंगे पतंग उड़ाते हैं । आसमां रंग-बिरंगे पतंगों से छा जाता है । मकर संक्रांति के दिन सूर्य की उत्तरायण गति आरम्भ होती है । शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राध्द, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है । ऐसी धारणा है कि इस दिन दिया गया दान 100 गुना बढ़कर पुनः प्राप्त होता है ।

वहीं दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल के रूप में मनाते हैं । दक्षिण भारत में पोंगल त्योहार को चार दिन तक मनाते हैं । पोंगल के पहले दिन लोग सुबह उठकर स्नान करके नए कपउ़े पहनते हैं और नए बर्तन में दुध चाँवल, काजू और गुड़ की चीजों से पोंगल नाम का भोजन बनाते हैं और सूर्य को अर्पित करते हैं,इंडस पब्लिक स्कूल दीपका में वचुअली मकर संक्रांति का त्योहार एवं पतंग का त्योहार मनाया गया । विद्यालय में विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जैसे पतंग बनाना एवं उड़ाना, पोस्टर मेंकिंग, संदेश लेखन आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की गई जिसमें बच्चों ने उत्साहित होकर सक्रिय भागीदारी ली । विद्यार्थियों ने रंग-बिंरगें पतंग बना करके आसमान को इंन्द्रधुनषीय के रंग से भर दिए । छठवीं से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने पतंग उड़ाते हुए अपना विडियो विद्यालय के कक्षा ग्रुप में सांझा किया । वहीं पहली से पाँचवी कक्षा के रंग-बिरंगे पतंग बना करके सबको आकर्षित किया । नवमीं एवं दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने मकर संक्रांति त्योहार पर शुभकामनाएं संदेश कार्ड बनाएं । विभिन्न रंगों के कार्ड बहुत ही आकर्षक एवं मनमोहक लग रहे थे । विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों को उनके सक्रिय भागीदारी के लिए आभार प्रकट किया और मकर संक्रांति की शुभकामना दी । इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती चिंचु जे. ने पोंगल के महत्व को बताते हुए कहती है पोंगल का त्योहार दक्षिण भारत में चार दिनों तक मनाया जाता है । यह त्योहार तमिल महीने के तइ की पहली तारीख से शुरू होता है इस त्योहार में इन्द्रदेव और सूर्य की उपासना की जाती है । पांगल का त्योहार संम्पन्नता को समर्पित है । पोंगल में समृध्दि के लिए वर्षा, धुप और कृषि से संबंधित चीजों की पूर्जा अर्चना की जाती है । पोंगल के आखरी दिन को माटु पोंगल कहते हैं इस दिन बैलों की पूजा अर्चना की जाती है और खुब खिलाया पिलाया जाता है । शाम के समय बैलों को सजाकर इसका रैली निकाला जाती है,अंत में विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने मकर संक्रांति के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है । बाकि दिनों की अपेक्षा इस दिन दान का विशेष महत्व होता है । इस दिन व्यक्ति को यथासंभव किसी गरीब को अन्नदान, तिल व गुड़ का दान करना चाहिए । मकर संक्रांति, उत्तरायण, पोंगल या पौष संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है और धनुराशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में मनाते हैं जबकि आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और केरल में इसे ?संक्रांति? कहते हैं। यह सूर्य की उपासना का पर्व है। पंजाब में एक दिन पहले लोहड़ी मनाई जाती है, जो एक मौसमी पर्व है। किसानों के लिए यह उत्साह और उल्लास का अवसर है जब हाड़ कंपाती हवाएं अलविदा होने लगती हैं और नई फसल का समय सामने आ जाता है। इस प्रकार कुल मिलाकर यह पर्व और यह समय पूरी तरह कुदरत को समर्पित है। इसे आप कुदरत के प्रति आभार व्यक्ति करने का त्योहार मान सकते हैं। आस्था एवं विश्वास का प्रतीक मकर संक्रांति का त्योहार सभी को नई ऊर्जा, नई ताजगी से भर दे आपके जीवन में खुशियों की बौछार हो इसी शुभकामनाओं के साथ में आप सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देता हुँ । सूर्य का त्योहार मकर संक्रांति लाए आपके जीवन में ज्ञान एवं खुशियों का भंडार