जल संरक्षण के लिए खुदवाऐ गए तालाबों का अस्तित्व खतरे में । आखिर कब लेगा जिला प्रशासन व तहसील प्रशासन इस ओर संज्ञान?

सीतापुर/ बारिश के जल संरक्षण के लिए तालाबों की उपयोगिता एवं अस्तित्व बनाए रखने के वास्ते शासन का निर्देश और न्यायालय का आदेश यहां मिश्रिख तीर्थ नगर में प्रशासनिक उदासीनता के चलते पूरी तरह हवा हवाई साबित हो रहा है। दर्जनों प्राचीन तालाबों का पाटकर भूमाफिया इमारतें खड़ी करते चले जा रहे हैं। बड़े तालाबों का राजस्व अभिलेखों में अंकन ही नहीं है आखिर इसका जिम्मेदार कौन? तहसील प्रशासन,जिला प्रशासन या फिर संबंधित राजस्व कर्मियों की टीम। बताते चलें कि हर छठे माह लेखपालों द्वारा पहली खसरा परिवर्तित करने का कार्य किया जाता है जिनमें दशकों पुराने तालाबों का उल्लेख न किया जाना पूरे सिस्टम को ही कठघरे में खड़ा कर रहा है।सतयुग कालीन महर्षि दधीचि की पौराणिक तपोस्थली के नाम से सुविख्यात नगर की पावन वसुंधरा पर देवताओं द्वारा स्थापित दधीचि कुंड तीर्थ एक बृहदाकार तालाब के रूप में ही स्थित है जिसकी दयनीय दशा किसी से छिपी नहीं है।अगर यह दधीचि आश्रम की सम्पत्ति न होती तो भूमाफिया इसको भी पाटकर इमारतें खड़ी कर चुके होते।बताते चलें कि आजादी के पहले से नगर के चारों ओर दर्जनों की तादात में सैकड़ों हेक्टेयर में फैले तालाबों की शोभा देखते ही बनती थी।इस पौराणिक तपोभूमि के सीतापुर हरदोई मार्ग पर नहर चौराहा और तहसील चौराहा के बीच में स्थित अति प्राचीन तालाबों को पाटने के बाद बनाए गए भवन के अन्दर आर्यावर्त बैंक शाखा, कालिंदी देवी गेस्ट हाउस के साथ ही की मकान व दुकानें संचालित हो रही है।इतना ही नहीं नगर से मछरेहटा जाने वाली रोड के किनारे देवा गेस्ट हाउस पास प्राचीन तालाब को पाटकर बनाई गई बिल्डिंग में एक भूमाफिया दर्शाया गणविनायक ट्रेंडर्स के नाम से प्रतिष्ठान का संचालन किया जा रहा है।नगर के सिधौली जाने वाले मार्ग पर रेलवे क्रासिंग के पहले एमडी इंटर कालेज के सामने रोड के दक्षिण सटे हुए काफी पुराने बड़का तालाब में पटाई करके भूमाफियाओं ने पिलर खड़े कर अपने मकान और दुकानें बना ली हैं। दधीचि कुंड तीर्थ के पीछे स्थित प्राचीन तालाब को भी पाटकर कई भवनों का निर्माण किया जा चुका है।इसी तरह तहसील मुख्यालय के पीछे रामनगर और नई बस्ती के मध्यम स्थित सदियों पुराने बड़े तालाब के किनारों को पाटकर भूमाफियाओं दर्शाया दर्जनों मकानों का निर्माण कराया जा चुका है और प्रक्रिया निरंतर जारी है।इस मामले में तहसील के तत्कालीन एसडीएम हरिकान्त त्रिपाठी ने इस तालाब के विलुप्तीकरण की सज्ञानता को लेकर तहसील के कई लेखपालों की टीम लगाकर पैमाईश कराई थी और दर्जनों दोषियों के विरुद्ध 115सी की कार्यवाही का संचालन करके भारी जुर्माना निर्धारित किया था लेकिन ट्रांसफर के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया ना ही किसी ने जुर्माना भी अदा किया और तालाब में किया गया अवैध कब्जा ही छोड़ा। वावजूद इसके दर्जनों नये भवनों का निर्माण भी तालाब के किनारे की भूमि पर अब भी किया जा रहा है। क्षेत्रीय लेखपाल की दूषित नीतियों से प्रशासन की सज्ञानता में तालाबों पर धड़ाधड़ हो रहे अवैध कब्जों की बात लाई ही नहीं गई है। इसलिए तहसील प्रशासन पूरी तरह अन्जान बना हुआ है वहीं भूमाफिया नगर के बचे तालाबों को निरन्तर पाटकर भवनों का निर्माण कराने में मशगूल हैं। तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन विलुप्त होते जा रहे तालाबों की तरफ आखिर कब लेगा संज्ञान?