त्रिपुरारी पाण्डेय कि रिपोर्ट/संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे पंडित त्रिपुरारि पांडेय

संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे पंडित त्रिपुरारि पांडेय

(स्वतंत्र कवि मंडल सांगीपुर सहित क्षेत्र के संभ्रांत लोगों ने प्रकट की शोक संवेदना)

सांगीपुर, प्रतापगढ़। 16 नवंबर,
जनपद रायबरेली की सलोन तहसील के झखरासी गांव निवासी लगभग 100 वर्षीय पंडित त्रिपुरारि पांडेय के असामयिक निधन की जानकारी होने पर स्वतंत्र कवि मंडल सांगीपुर सहित क्षेत्र के संभ्रांत लोगों में शोक की लहर दिखाई पड़ी। लोगों ने शोक संवेदना प्रकट करते हुए पंडित त्रिपुरारि पांडेय को संस्कृत का प्रकांड विद्वान बताया। कहा कि पंडित जी के निधन से हिंदी साहित्य एवं संस्कृत क्षेत्र की अपूर्णनीय क्षति हुई है।
संस्कृत भाषा पर कमांड रखने वाले पंडित जी शास्त्रार्थ करने में बेजोड़ थे। उन्हें विद्वता के लिए कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
शोक संवेदना प्रकट करने वालों में मानस मंथन के संचालक शिक्षाविद पंडित भवानी शंकर उपाध्याय, शिक्षक मनो विश्राम मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता परशुराम उपाध्याय सुमन, ओमप्रकाश पांडे गुड्डू, सूर्यभान सिंह सहित स्वतंत्र कवि मंडल सांगीपुर के अध्यक्ष अर्जुन सिंह, संरक्षक यज्ञ नारायण सिंह, अशोक विमल, गुरु वचन सिंह बाघ, महादेव प्रसाद मिश्र बमबम, यज्ञ कुमार पांडेय यज्ञ, डॉक्टर एस पी सिंह शैल, महावीर सिंह, जनार्दन प्रसाद उपाध्याय, बम बहादुर सिंह राजेंद्र,कृष्ण नारायण लाल श्रीवास्तव, लालकृष्ण प्रताप सिंह, प्रेमचंद्र मिश्र, डॉक्टर निरंकार सिंह, योगेंद्र कुमार पांडेय, पवन शुक्ला, अरविंद सत्यार्थी, लाल गजेंद्र प्रताप सिंह, राजेश कुमार पांडेय, राजेंद्र कुमार मिश्र, आशुतोष मिश्र, कैप्टन बद्री प्रसाद उपाध्याय आदि रहे।