अली अब्बास ने कोरोना महामारी की वजह से हज़रत अली का ताबूत नही उठाया गया ---

मोहर्रम कमेटी अली अब्बास सौरिख कन्नौज ने कहा कि इक्कीस रमज़ान को हज़रत अली की शहादत के मौके पर ताबूत उठाया जाता था मगर कोरोना ने भयंकर रूप धारण कर लिया है इस लिये ताबूत को मस्जिद में ही रखा गया और एक एक करके लोगों ने ताबूत की ज़्यारत की ।हज़रत अली उन्नीस रमज़ान को मस्जिदे कूफ़ा में सुबह की नमाज़ पढ़ रहे थे उसी वक्त दुनियां का पहला आतंकवादी इब्ने मुल्ज़िम ने तलवार से सर में वार कर दिया और वह ज़ख्मी हो गये उनकी शहादत इक्कीस रमज़ान को जामे शहादत नोश करने वाले हज़रत अली ने तिरेसठ साल की ज़िंदगी गुज़ार कर इस दुनियां से चले गये ,लेकिन हज़रत अली की ज़रूरत इंसानियत को चौदह सौ साल पहले भी थी और आज भी है और हमेशा रहेगी ।यही वजह है कि कल के सियासत दानों और ज़ालिमों को जिस तरह अली का अदल खटकता था उसी तरह आज के शातिराना सियासत करने वाले जालिमो को अदल और इंसाफ कायम करने वाले और जस्टिस की आवाज़ बुलंद करने वाले अच्छे नही लगते हैं ।हज़रत अली ने सारी ज़िंदगी अल्लाह की इबादत की और खिदमते ख़ल्क़ का दर्स अपनी सीरत और किरदार से देते रहे ।आप ख़लीफए वक्त होने के वाद भी रात की तन्हाइयों में अपने कंधे पर रोटियों का गठ्ठर रख कर अल्लाह की भूखी मख़लूक़ तक पहुंचाते थे और उनका कहना था कि पड़ोसी किसी भी जाति धर्म का हो यदि वह भूखा हो तो उसकी भूख को मिटाना और उसकी ज़रूरतों को पूरा करना हमारा फ़र्ज़ है और वह अपने मा तहतों से कहते थे कि देखो अवाम में दो तरह के लोग हैं एक वह हैं जिनका और तुम्हारा मज़हब एक है और दूसरे वह हैं जिनका और तुम्हारा मज़हब एक नही हैं मगर उनका पैदा करने वाला और तुम्हारा पैदा करने वाला एक है और तुम दोनों के हाकिम हो इस लिये दोनों के साथ बराबर से इंसाफ करना खबरदार ऐसा न हो कि तुम यह भूल जाओ कि तुम सबके हाकिम हो याद रखो सब अल्लाह के बन्दे हैं और सबके साथ बराबर का इंसाफ।करना ।हज़रत अली ने अपने गवर्नरों को साफ लिखा था कि अवाम के साथ इंसाफ करना याद रखना कि जब टैक्स लेने जाना तो सबसे पहले यह देख लेना कि अवाम के पास साल भर खाने का अनाज ,सर्दी,गर्मी के कपड़े आदि सारी चीजें मुहैया हैं या नही अगर ऐसा नहीं है तो यह सारी चीजें उन्हें देकर आना चाहे ख़ज़ाने पर कितना ही बोझ क्यों न पड़े।इसका मतलब अली की हुकूमत में टेक्स सिर्फ उस पर था जो टेक्स दे सकता था और ग़रीबों की ज़िम्मेदारी हुकूमत पर थी ।अली सिर्फ ह्यूमन राइट्स का ही नही एनीमल राइट्स का भी पूरा ख्याल रखते थे ।हमारा आप लोगों से यही कहना है कि अली के बताये हुए रास्ते पर अमल करें और बिला वजह घरों से बाहर न निकलें यदि ज़रूरी हो मास्क लगाकर ही निकलें शासन प्रशासन का सहयोग करें स्वास्थ्य विभाग के बताये हुये रास्ते पर अमल करें इसी में हम सब की भलाई है