कोविड-19 के कारण बच्चों के सीखने और विकास करने की प्रक्रिया पर पड़ा बुरा असर, अभिभावकों ने जताई चिंता

कोविड-19 के कारण देशभर में प्री-स्कूल बच्चों के सीखने और विकास करने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ा है। प्री-स्कूल बच्चों के माता-पिता के साथ यूरोकिड्स इंटरनेशनल द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, कोविड -19 महामारी के कारण मार्च में स्कूलों को जल्दी बंद कर दिया गया और परिणामस्वरूप 2020 का शैक्षणिक वर्ष पूरी तरह बाधित हो गया। अब अभिभावक अपने बच्चों के बारे में काफी चिंतित हैं, क्योंकि बच्चे सीखने की प्रक्रिया से दूर होते जा रहे हैं। ज्यादातर अभिभावकों का मानना है कि इस महामारी के दौरान बच्चों की शिक्षा को जारी रखना बहुत महत्वपूर्ण है।
सर्वेक्षण के परिणामों से पता चलता है कि बच्चों की पढ़ाई को निरंतर बनाए रखने के लिए ज्यादातर माता-पिता बेहद चिंतित नजर आते हैं और 95 प्रतिशत अभिभावकों ने अपने बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखने के लिए उन्हें आॅनलाइन या होम स्कूलिंग- कहीं भी दाखिला करा दिया है। यह पूछे जाने पर कि एक सप्ताह के दौरान बच्चे कितना समय तक सीखने में खर्च करते हैं, 43 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि लर्निंग प्रोसेस के लिए बच्चे सप्ताह में एक से तीन घंटे के बीच बिताते हैं, जबकि 37 फीसदी ने कहा कि बच्चे तीन घंटे से अधिक का समय सीखने में बिताते हैं।
छोटे बच्चों के लिए ऑनलाइन लर्निंग प्रोसेस में माता-पिता की भागीदारी और सीखने की प्रक्रिया में उनके बच्चों के साथ बिताए जाने वाला समय भी एक महत्वपूर्ण कारक है। यह पूछे जाने पर कि एक सप्ताह में माता-पिता अपने बच्चे की शिक्षा पर कितना समय व्यतीत करते हैं, 43 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे सप्ताह में तीन घंटे से अधिक समय बच्चों के साथ बिताते हैं, जो दर्शाता है कि छोटे बच्चों को लर्निंग प्रोसेस में अपने माता-पिता की सहायता की आवश्यकता होती ही है। उत्तरदाताओं में से 42 प्रतिशत ने बताया कि वे अपने बच्चे के सीखने के लिए सप्ताह में एक से तीन घंटे समर्पित करते हैं। प्रतिक्रियाओं में गहराई से देखने पर पता चला कि यह कई माता-पिता के लिए समस्या का विषय है और उन्हें अपने बच्चों के सीखने के लिए बहुत अधिक समय देना पड़ता है, जिसमें ऑनलाइन कक्षाएं, फिर संबंधित होमवर्क और अतिरिक्त गतिविधियां शामिल हैं।
उत्तरदाताओं में से 33 प्रतिशत लोगों का मानना है कि जब प्री-स्कूल खुलते हैं, तो 2-3 घंटे की एक एकल शिफ्ट प्री-स्कूल उनके बच्चे के लिए सबसे उपयुक्त होगी, जबकि 20 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि स्कूलों में डबल शिफ्ट में छोटे बैच, उदाहरण के लिए, सुबह और दोपहर में अलग-अलग बैचों के लिए रोजाना दो घंटे स्कूल चलाना ज्यादा ठीक रहेगा। 70 प्रतिशत से अधिक अभिभावकों ने यह भी कहा कि अगर अगले छह महीनों में स्कूल फिर से नहीं खुलते हैं, तो वे ऑनलाइन लर्निंग प्रोसेस को चुनना पसंद करेंगे, जिसमें अध्यापक के साथ-साथ माता-पिता की भी भूमिका होगी। दूसरी तरफ, 22 प्रतिशत लोगांे ने होम स्कूलिंग को अपना पसंदीदा विकल्प बताया, जिसमें टीचर के सहयोग के साथ माता-पिता भी बच्चों को पढ़ाने के लिए तत्पर होंगे।
चूंकि प्री-स्कूल एक साल पहले ही बंद हो गए थे, ऐसे में ज्यादातर माता-पिता का मानना है कि जीरो एजुकेशन ईयर होने से तो अच्छा है कि बच्चों को आॅनलाइन पढ़ाया जाए। अपने बच्चों के सीखने के परिणामों की उपलब्धि के बारे में पूछे जाने पर, माता-पिता ने कहा कि उनके बच्चों ने किसी भी अन्य कौशल की तुलना में पूर्व-शैक्षणिक कौशल जैसे कि रंगों को पहचानना, मुद्रित नामों को समझना, वर्णमाला के अक्षर, संख्या, आदि को पहचानना सीखा। सर्वेक्षण के दौरान कई अभिभावकों ने यह भी कहा कि बाधाओं के बावजूद लर्निंग प्रोसेस को तो कभी भी पूरा किया जा सकता है, लेकिन बच्चों के सामाजिक और शारीरिक विकास को लेकर मामला चिंताजनक है। सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, ऑनलाइन प्री-स्कूलिंग में अपने बच्चों को दाखिला दिलाने वाले 80 प्रतिशत माता-पिता ने स्पष्ट तौर पर बेहतर शैक्षिक परिणाम हासिल किए और इसीलिए इनमें से 75 प्रतिशत माता-पिता अपने दोस्तों और परिवारों को ऑनलाइन प्री-स्कूलिंग की सिफारिश करने के लिए तैयार थे।