हैण्डपम्प की खराबी से गाँवो मे पेयजल संकट-

बहराइच -विकासखंड कैसरगंज मे 30 प्रतिशत से अधिक हैंडपंप हर गांव में खराब पड़े हैं। विकासखंडमें सबको शूद्ध एवं निर्मल जल मिल सके इसके लिए जल निगम की ओर से कैसरगज की 71 ग्राम सभाओं में 2933 इंडिया मार्का हैंडपंम्प लगाए गए। जिसमें लगभग तीन सौ से अधिक नल रिबोर की स्थिति में है तथा चार सौ से अधिक नल खराब पड़े है । जो चल भी रहे है वह भी हैण्डपम्प तकनीकी खराबी से आते दिन खराब रहते हैं। विकासखंडके अंतर्गत शासन द्वारा संचालित यह योजना जल निगम व ग्राम पंचायतों के रुचि न लेने के कारण पिसती नजर आ रही है। गांवो में लगवाए गए हैंडपंप के जरिए ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से छुटकारा तो अवश्य मिला लेकिन इसके क्रियान्वयन में बरती गई खामियों से आए दिन आ रही तकनीकी खराबी से ग्रामीणों को फिर उसी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। विकासखंडके 71 ग्राम सभाओं में जिन गांवों में नलों की हालत खस्ता है और नल रिबोर की स्थिति में है। उनमें गोडहिया नंबर दो में चार, महतोपुरवा मे तीन गोडहया नंबर एक में तीन, हैदरपुर नौबस्ता में तीन, कडसर में दो, आगापुर में दो, बांस गांव में एक, सराय कनहर में दो, वेरी महेशपुर में दो, ऐनी में दो, नौगइयाॅ में दो, गुलरिया गाजीपुर में एक,वैरी शाल पुर में दो, भकला में एक, रेवली में दो, गोडहिया नंबर 4 में तीन, देवलखा में दो, नत्थनपुर में एक, आगापुर में दो, बदरौली में पाँच , मतरेपुर में तीन,डिहवा शेर बहादुर सिंह में चार, खजुहा पट्टी में दो,पबना मे दो,चिलवा मे एक,मीरपुर मे एक,पवही मे दो; बुढानपुर मे दो नल रिबोर की स्थिति में है इसके अतिरिक्त अभी लगभग दो दर्जन गांव ऐसे हैं जहां एक दो इंडिया मार्का हैंडपंप खराब है। सामान्य खराबी की तो बात छोड़िए। शायद ही ऐसा कोई नल हो जिसमें कोई छोटी मोटी खराबी ना हो मानक के अनुसार हैंडपंपों की बोरिंग न करने तथा इ में लगाए जाने वाले पुर्जो में भी कोताही बरतने से अधिकांश हैंडपंप कुछ ही दिनों में ग्रामीणों से अपना मुंह करते हुए दम तोड़ देते हैं।विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते क्षेत्र के दर्जनों हैंडपंप बेकार साबित हो रहे हैं पहले क्षेत्र में खराब इंडिया मार्का हैंडपंप जल निगम द्वारा ठीक कराया जाता था। परंतु वर्तमान समय में ऐसा नहीं होता है। कैसरगंज के गोडहिया नंबर दो में लगा हैंडपंप मिट्टी में पड़कर निष्प्रयोज्य हो गया है। वहीं सोनारी चौराहे पर लगा नल लकड़ी से पटा है। ग्रामीणों के अनुसार हैंडपंप खराब होने पर जब हम लोग विभाग का दरवाजा खटखटाते हैं तो वहां पर उपस्थित कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा यह कह कर टाल दिया जाता है कि अब मरम्मत का काम ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है। तभी से ग्राम प्रधानों की मनमानी के कारण कई हैंडपंप अपनी फूटी किस्मत को कोसते हुए मौन धारण किए हुए हैं। जबकि ग्राम पंचायतों की होने वाली खुली बैठकों में बिगड़े हुए हैंडपंपों व अन्य कार्यों को अंजाम देते हुए प्रस्ताव पारित करने व ऐसे ही अनेक कार्यों के खर्च वहन करने का शासन से अधिकार प्राप्त है ।कुल मिलाकर केसरगंज क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा हैइस संबंध में जब खंड विकास अधिकारी सन्दीप कुमार सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत वार खराब नलों की सूची तैयार की गई है। तथा नलो को दुरूस्त कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सामान्य खराबी व रिबोर की स्थिति वाले नलो को दुरूस्त कराये।*