तुम कहो सब ठीक है 10 ही मरे! मेरी रातें महफूज हैं, तो भला फिर क्यूं डरें!

(प्रमोद गुप्ता 9005392789)

विरोध हूं ........

चलो माना कि मै एक सुचारू विरोध हूं!
निरंकुश रास्तों पर पड़ा अवरोध हूं!

तुम कहो सब ठीक है 10 ही मरे!
मेरी रातें महफूज हैं, तो भला फिर क्यूं डरें!

आंकड़ों के आंकलन में भ्रम है बड़ा!
मैं चिताओं का जिंदा शोध हूं!
चलो माना कि मै एक सुचारू विरोध हूं!

उसके सपनों में भी थे चांद और तारे कई!
रोज गिरना और संभलना, फिर भी उम्मीदें नई!

कभी धमकाना, फिर सहलाना पिता का असमंजस लिए!
सच सुनो तो इसी व्यवस्था से ही उपजा क्रोध हूं!
चलो माना कि मै एक सुचारू विरोध हूं!

बज उठी हैं थालियां ये स्वर बड़ा घनघोर है!
जो सिपाही बन के आया वो ही असली चोर है!
संबल सब तोड़ते हैं वो अकेला कैसे लड़े?
रण में वो किंचित सफल है, मैं निराधार प्रतिशोध हूं!
चलो माना कि मै एक सुचारू विरोध हूं!

प्रकृति की आपदा पर जोर है किसका भला!
सब्र रख तू हे पथिक, संकट भी अब ये है टला!
फिर उठेंगे, फिर लड़ेंगे, जीत कर दिखलाएंगे!
मन को थोड़ा शांत रख तू, मैं समय का बोध हूं!
चलो माना कि मै एक सुचारू विरोध हूं!

सच भी कहना चुप भी रहना ये हुनर की बात है!
कट ही रही है कट भी जाए ये अंधेरी रात है!
वो मरा है मौत से या मुझ पर ही वो मर गया?
जो भी है देखा करो बस मै तो एक प्रमोद हूं!
चलो माना कि मै एक सुचारू विरोध हूं!
बस एक छोटी सी उम्मीद.....
एस. पी. पांडेय