लोकार्पण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा पर बवाल, सभापति ने जमीन पर बैठकर जताया विरोध

CITIUPDATE NEWS(संतोष सारथी)कोरबा। नगर निगम कोरबा में लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रमों की सूचना महापौर, सभापति और संबंधित पार्षदों को नहीं दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया। जनप्रतिनिधियों ने इसे उनकी गरिमा और अधिकारों की अवहेलना बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। विरोध स्वरूप नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर सोमवार को निगम कार्यालय स्थित अपने कक्ष में जमीन पर बैठकर कार्य करते रहे। उनके समर्थन में कुछ पार्षद भी धरने की मुद्रा में जमीन पर बैठ गए।

विवाद की शुरुआत गत दिनों आयोजित नगर सौंदर्यीकरण योजना के तहत अग्रसेन चौक, कोसाबाड़ी चौक और आईटीआई चौक में स्थापित प्रतीक चिह्नों के लोकार्पण तथा सुनालिया मल्टी लेवल पार्किंग के समीप ईवी चार्जिंग स्टेशन के उद्घाटन कार्यक्रम से हुई। इन कार्यक्रमों में प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। हालांकि कार्यक्रम में महापौर, सभापति तथा संबंधित वार्डों के पार्षदों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई।

सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन द्वारा विभिन्न वार्डों में हो रहे विकास कार्यों, लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रमों की जानकारी जनप्रतिनिधियों को नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले भी निगम आयुक्त को अवगत कराया गया था, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उनका कहना था कि यदि सदन के सदस्यों और पार्षदों का इस प्रकार अपमान किया जाएगा तो सभापति के रूप में कुर्सी पर बैठकर कार्य करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

पार्षद अब्दुल रहमान ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि महापौर, सभापति और पार्षदों को कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी स्थिति दोहराई गई तो जनप्रतिनिधि संबंधित कार्यक्रम स्थलों पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

मामले के तूल पकड़ने के बाद नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने निगम सचिव रामेश्वर सिंह कंवर को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त ने कहा कि कार्यक्रमों में महापौर, सभापति और पार्षदों को आमंत्रित करने की जिम्मेदारी निगम सचिव की होती है। नोटिस के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित जनप्रतिनिधियों को सूचना देने की प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

आयुक्त ने यह भी बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में ई-कार्ड, मोबाइल संदेश और अन्य माध्यमों से भी सूचनाएं भेजी जाती हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने महापौर एवं सभापति से दूरभाष पर चर्चा कर खेद व्यक्त किया तथा भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति नहीं होने का आश्वासन दिया।

आयुक्त की कार्रवाई और आश्वासन के बाद सभापति ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यह महज प्रशासनिक चूक थी या फिर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का मामला।