कोल इंडिया, CMPDI, SECL और निजी कंपनियों के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ के कयास?बैक-डेट एंट्री से सॉफ्टवेयर में हेराफेरी के संगीन आरोप

CITIUPDATE NEWS(संतोष सारथी)कोरबा/छत्तीसगढ़/रायगढ़ देश के सरकारी खजाने को सीधे तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले एक बड़े सॉफ्टवेयर और तकनीकी-कॉर्पोरेट सिंडिकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह मामला किसी स्थानीय खदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कोल इंडिया लिमिटेड CIL उसकी तकनीकी विंग CMPDI और SECL के शीर्ष अधिकारियों की सीधी मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं।

इस संबंध में सूचना अधिकार कार्यकर्ता एवं आवेदक जितेंद्र कुमार साहू ने माननीय मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो समेत देश की शीर्ष जांच एजेंसियों को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय न्यायिक और फॉरेंसिक जांच की मांग की है।

शिकायत पत्र के अनुसार, इस पूरे खेल को एक सोची-समझी रणनीति के तहत अंजाम दिया जा रहा है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं l

शुरुआती बेस-ग्रेड में जानबूझकर विसंगति

CMPDI के तकनीकी अधिकारियों द्वारा खदानों के शुरुआती निर्धारण में जानबूझकर ऐसी कमियां छोड़ी जाती हैं, जिससे आगे चलकर निजी कंपनियों को कानूनी लाभ मिल सके।

कागजों पर ऊंची क्वालिटी, बाद में गिरावट, डिस्पेंच के समय कोयले को कागजों पर उच्च ग्रेड जैसे G10, G11 का दिखाकर भारी राजस्व बुक किया जाता है। बाद में तृतीय पक्ष लैब्स जैसे CIMFR, QCI, IGM से कथित सांठगांठ कर कोयले की गुणवत्ता को गिरा दिया जाता है।

सॉफ्टवेयर में बैक-डेट एंट्री गुणवत्ता गिरने के बाद SECL मुख्यालय के शीर्ष प्रबंधन के लॉगिन क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके सॉफ्टवेयर में पीछे की तारीख में जाकर डेटा बदल दिया जाता है।

इस खेल के जरिए कोयला असल में उच्च श्रेणी का ही उद्योगों में जल जाता है, लेकिन कागजों पर उसे घटिया दिखाकर Vedanta, DB Power, JSPL जैसी रसूखदार निजी कंपनियों को क्रेडिट नोट जारी कर सरकारी खजाने से पैसा वापस कर दिया जाता है l

रायगढ़ क्षेत्र में करोड़ों का खेल हुआ है, दस्तावेज़ के मुताबिक, कोल इंडिया के शीर्ष नेतृत्व के पास पूरे देश के ग्रेड स्लिपेज और वित्तीय रिवर्सल की निगरानी प्रणाली होती है। इसके बावजूद रायगढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वित्तीय समायोजन किया गया, वर्ष 2021-22 ₹295.56 करोड़ का वित्तीय समायोजन/रिफंड दर्ज। इसी तरह वर्ष 2022-23 मे ₹208.16 करोड़ का वित्तीय समायोजन/रिफंड दर्ज।
इतने बड़े वित्तीय बदलावों के बाद भी शीर्ष नेतृत्व द्वारा कोई बड़ा ऑडिट या तकनीकी जांच नहीं बैठाया जाना, उनकी मौन सहमति और संरक्षण की ओर इशारा करता है। अकेले SECL ने पूर्व में पत्र क्रमांक 830 के तहत ₹18,07,19,620/-** का रिफंड निजी कंपनियों को जारी करने की बात स्वीकार की थी।


शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब इस महाघोटाले की आंच कोल इंडिया और SECL मुख्यालय की ओर बढ़ने लगी, तो प्रथम अपीलीय अधिकारी के स्पष्ट आदेश दिनांक 06/05/2024 की भी अवहेलना की गई और कंपनी-वार क्रेडिट नोट्स की सूची नहीं दी गई। यहाँ तक कि इस शक्तिशाली सिंडिकेट ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर केंद्रीय सूचना आयोग तक से अपने पक्ष में फैसला करवा लिया, ताकि इस लूट का फाइनेंशियल ट्रेल कभी जनता और न्यायालय के सामने न आ सके।

देश की आर्थिक संप्रभुता और प्रशासनिक शुचिता की रक्षा के लिए आवेदक ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाने की मांग की है l


1. फॉरेंसिक अकाउंटिंग ऑडिट की मांग जिसके तहत रिफंड के नाम पर निजी कंपनियों को ट्रांसफर किए गए सैकड़ों करोड़ रुपयों की गहन फॉरेंसिक जांच हो।

2. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोल इंडिया, CMPDI, खदान प्रबंधकों और निजी कंपनियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए।

3. कोल इंडिया और SECL के मुख्य सर्वर्स के ऑडिट ट्रेल्स को तुरंत सीज किया जाए ताकि यह साबित हो सके कि किस स्तर के अधिकारियों के लॉगिन से बैक-डेट एंट्री को मंजूरी दी गई थी।

4. इस पूरे मामले की जांच माननीय न्यायालय की प्रत्यक्ष निगरानी में कराई जाए।


करोड़ों रुपये के इस कथित कोयला के खेल ने रायगढ़ से लेकर दिल्ली तक प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर रचे गए इस चक्रव्यूह को भेदने के लिए शासन-प्रशासन किस तरह की कार्रवाई करता है क्या जांच सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी या फिर इस सिंडिकेट के शीर्ष मगरमच्छों पर भी कानून का शिकंजा कसेगा? इस पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई ही देश के राजस्व की सुरक्षा और तंत्र पर जनता के विश्वास को बहाल कर सकती है।